हँस कर बोल हमेश, क्यूं चित में चिंता करै।

पाळै वो परमेश, चांच दई जिन, चकरिया॥

भावार्थ:- हे चकरिया, जिसने चोंच दी है, वही परमेश्वर (चुग्गा प्रदान कर) पालन-पोषण भी करता है (आशय यह है कि हमारा पालन-कर्त्ता भी परआत्मा ही है) अतः मन में (व्यर्थ ही) क्यों चिंता करता है? तू तो हमेशा प्रसन्न होकर हँसते ( —हँसते) हुए (मधुरता से) बोल।

स्रोत
  • पोथी : चकरिये की चहक ,
  • सिरजक : साह मोहनराज ,
  • संपादक : भगवतीलाल शर्मा ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी ग्रंथागार
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