छिन में देसी छोड़, प्राण पखेरू पांवणो।
कर-कर कूड़ा कोड, चित मत ललचा, चकरिया॥
भावार्थ:- हे चकरिया, इस शरीर में प्राण रूपी पक्षी तो अतिथि है जो (अंत समय आने पर) क्षण भर में (शरीर को) छोड़ देगा; इसलिए झूठा उमंगित हो-होकर मन को (सांसारिक) लालच में मत फँसा।