बचणौ मुश्किल बात, जग री मोहा जाळ सूं।

मुनि जन खाई मात, चाल चूक कर, चकरिया॥

भावार्थ:- हे चकरिया, जगत् के मोह रूपी जाल से बचना (अछूता रहना) बहुत ही कठिन कार्य है। (त्यागी-तपस्वी) सिद्ध-मुनि भी (मोह-पाश में बाँधकर) सन्मार्ग छोड़कर मात खा गए (हार गए)

स्रोत
  • पोथी : चकरिये की चहक ,
  • सिरजक : साह मोहनराज ,
  • संपादक : भगवतीलाल शर्मा ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी ग्रंथागार
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