धन, तन, गिटसी धाम, नाम काम दुय ना मिटै।
गुण अवगुण सब गाम, चरचा करसी चकरिया॥
भावार्थ:- हे चकरिया, (समय आने पर) शरीर, धन और आवास (इत्यादि) नष्ट हो जाएँगे; परंतु मनुष्य का नाम और उसके कार्य—ये दो (संसार से) नहीं मिटेंगे। उसके (अच्छे-बुरे कर्मों के अनुसार उसके) गुण-अवगुणों की चर्चा सभी गाँव (गाँव) करेंगे।