बीती करो न बात, आशा करो न अगली।
होणी हरि रै हात, चोखी भूंडी, चकरिया॥
भावार्थ:- हे चकरिया, जो बीत है, उसकी बात मत करो (अर्थात् जो जैसा भी हो गया, उस पर चिंता या पश्चाताप मत करो) और भविष्य में जो होना होगा, उसकी भी आशा मत रखो। अच्छा या बुरा—जो कुछ भी होना (अर्थात् होनहार), वह सब ईश्वर के हाथ है (ईश्वराधीन है और मनुष्य कुछ नहीं कर सकता) ।