बैरी पूछै बात, हित री कहणी हक्क है।

हार जीत हरि हात, चाल करणी, चकरिया॥

भावार्थ :- हे चकरिया, अगर शत्रु भी (हमारे पास) किसी बात के बारे में सलाह पूछे, तो उसको उचित तथा हितकर सलाह ही देनी चाहिए। हार-जीत तो ईश्वर के हाथ की बात है; (हाँ) हमें उसके साथ कपटपूर्ण आचरण अवश्य नहीं करना चाहिए।

स्रोत
  • पोथी : चकरिये की चहक ,
  • सिरजक : साह मोहनराज ,
  • संपादक : भगवतीलाल शर्मा ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी ग्रंथागार
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