ग़ज़ल15 आभै में घटावां कोई गा रह्यो गजल इण आस में जीणो पड़ै संसार बदळसी इब भेळा परिवार कठै है बची-खुची पूंजी भी इब तो छीजण लागी भटक्योड़ा नै मारग ल्याणों सोरो कोनी