गीत3 गुण गजेन्द्र मैमंत चले कळिजुग्ग सरोवरि जवन आगि भटके घरौ साहिजहां जीवतै प्रबल गाजि घण बांण घमसांण पैला
कवित्त4 करि प्रणाम रवि ताम पड़े वाज गजराज राव रावत्त नरेसुर साख साख मिळि भाख लाख लाखीक लसक्कर हिंदुवाण तुरकाण करण घमसाण कड़क्खै