सब सुख आपै रोर कांपै, निरधारां आधार॥

सब सुख आपै रोर कांपै, निरधारां आधार॥

नारद सारद द्वारे गावे, कीरति करै कै वार॥

नाथ तूँ अनाथ बंधू, दालिद भंजनहार॥

अखें अमरपद च्यारी पदारथ, देत लावे बार॥

मैं अस करिनें गाइयो, कमला नों भरतार॥

दूझै सदा भगति कै होझै, पंडित नांहि धार॥

भगति भूरि दान आपै, मुकति पाडी लार॥

पीलीपहु आराधियो, म्हारा समरथ सिरजनहार॥

‘बखना’ दरबार पहाऊ बोलै, वासन्यों करतार॥

स्रोत
  • पोथी : बखना जी की वाणी ,
  • सिरजक : बखना जी ,
  • संपादक : मंगलदास स्वामी ,
  • प्रकाशक : लक्ष्मीराम ट्रस्ट, जयपुर ,
  • संस्करण : प्रथम
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