बखना जी
दादूदयाल रा प्रमुख बावन शिष्यां में सूं एक। कवि अर गायक संत रै रूप में चावा। पदां में सांप्रदायिक सदभाव रो प्रचार अर आत्म ज्योति जगावण माथै बल दियौ।
दादूदयाल रा प्रमुख बावन शिष्यां में सूं एक। कवि अर गायक संत रै रूप में चावा। पदां में सांप्रदायिक सदभाव रो प्रचार अर आत्म ज्योति जगावण माथै बल दियौ।
आरसङी ऊजली रे
बाँटो द्यूँ नीरों घणा
भजि रे मन हरिचरण
भरमतो भरमतो, तुम्हारै सरणै आयो
भाव भजन की भाठी आगे
भो जल क्यूँ तिरो रे
देखी मैं डाकणी जरखि चढी
दूध की न मूत की
गावङी राखो हरि हावङी करती
हरिभज लाहो लीज्यो रे
माया वादली रे
मेरे मन के माने मोहनलाल
पहिले व्यांइति व्याइ गाई
पकड़ि पकड़ि मन को बैठाइ
सब सुख आपै रोर कांपै
तिहि तीरथ मेरा मन न्हावे