बखना जी
दादूदयाल रा प्रमुख बावन शिष्यां में सूं एक। कवि अर गायक संत रै रूप में चावा। पदां में सांप्रदायिक सदभाव रो प्रचार अर आत्म ज्योति जगावण माथै बल दियौ।
दादूदयाल रा प्रमुख बावन शिष्यां में सूं एक। कवि अर गायक संत रै रूप में चावा। पदां में सांप्रदायिक सदभाव रो प्रचार अर आत्म ज्योति जगावण माथै बल दियौ।
आया होई तो जाई क्यूं
आया प्रेम कहां गया
अमर जङी पांनै पङी
अठसठि पांणी धोइये
औजौं क्यों आशा रही
‘बखना’ बहुत बर नसिया
‘बखना’ बहुत बर नसिया
‘बखना’ मैल विचारि करि
‘बखना’ मन का बहुत रंग
‘बखना’ मन मैलो रह्यो
‘बखना’ वेद कतेबौ कागदौ
'बखना ' बांणीं सो भली
बखना वाणी बरसणी
भरिया होई तौ कदेन डोलै
भर्या न फूटै चिणगन छूटै
चौकौ दै अलगेरौ आछै
छह दर्शन हम वूझिया
दौदा धाहरिया हुवा
दूध मिल्यौ ज्यूं नीर मैं
डूंढा बालण वन दहण
हांजी कहत होइ भल
इहिं ओषधतै साध सब
जे बोल्या तौ राम कहि
जे डंक लागें सर्प का
जिहि अग्नि न धूवां नीसरै
कर माहैं माला फिरै
कौडी रमंता डावङौ
कौसा चौसर लैंणनैं
कीङी कुंजर सूं लङै
मन मांगै परि देई मत
मन मोटा मन पातला
मन मोटा मन पातळा
मन पवन अरु सुरति थिर
मांही रहै माहैं चरै
मनसा डाकणि मन जरख
मूल दुबारा रोक करि
पछि पांणी राखै नही
पहली था सौ अब नहीं
पैचौ तो आवै नहीं
पांच छिकारा मृगइक
रांम नांम जिन ओषदी
रांडां मिली मंगल कीयौ
सांकलि जङ्यो न सीलकै
सत जत सांच खिमा दया
सुणि जै ऊंडो गाजतौ
तैंही तौ धौला कीया
तिरि तेरू थाके सबै
यौं लै लावौ रामसूं