जूनौ कोस
नूवौ कोस
लोक परंपरा
ई-पुस्तक
महोत्सव
Quick Links
जूनौ कोस
नूवौ कोस
लोक परंपरा
ई-पुस्तक
महोत्सव
साइट: परिचय
संस्थापक: परिचय
अंजस सोशल मीडिया
दिमाग पर पद
पद
कविता
दूहा
काव्य खंड
उद्धरण
रमैणी
सबद
छंद
पद
19
समज मन सदा धर्म एक संगी
ऊमरदान लालस
रे मन जाहिलौ रे
संत टीला
यहु मन म्हारौ बरजौ रांम
संत टीला
मेरो मन बसि गो गिरधर लाल सों
मीराबाई
कहा करै माणस मन माड
संत हरदास
हीरा रे अे हीरा रे
संत टीला
दसपदी
संत हरदास
जुगत बिन सतरंज जीत न जानी
ऊमरदान लालस
आव रे आव मन पूरिखा
संत टीला
सतगुर सौं जो चाहि
रज्जब जी
दोख निज दीह न दीसै रे
ऊमरदान लालस
पहले दुख पीछे सुख होइ
रज्जब जी
अब कुछ रांम दया करि हम कूं
संत टीला
धनि परमेसुर धनि परमेसुर
संत टीला
नींदौ रे भाइ नींदौ रे
संत टीला
बुधि बेली लो, बेली लो
रज्जब जी
सब सुख आपै रोर कांपै
बखना जी
रे मन सूर समै क्यूं भागै
रज्जब जी
मना मान रे कह्यो
ऊमरदान लालस