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पद
20
समज मन सदा धर्म एक संगी
ऊमरदान लालस
रे मन जाहिलौ रे
संत टीला
यहु मन म्हारौ बरजौ रांम
संत टीला
मेरो मन बसि गो गिरधर लाल सों
मीराबाई
कहा करै माणस मन माड
संत हरदास
हीरा रे अे हीरा रे
संत टीला
दसपदी
संत हरदास
जुगत बिन सतरंज जीत न जानी
ऊमरदान लालस
सखी री चंदन दूरि निवारि
जिनहर्ष मुनि ‘जसराज’
आव रे आव मन पूरिखा
संत टीला
सतगुर सौं जो चाहि
रज्जब जी
दोख निज दीह न दीसै रे
ऊमरदान लालस
पहले दुख पीछे सुख होइ
रज्जब जी
अब कुछ रांम दया करि हम कूं
संत टीला
धनि परमेसुर धनि परमेसुर
संत टीला
नींदौ रे भाइ नींदौ रे
संत टीला
बुधि बेली लो, बेली लो
रज्जब जी
सब सुख आपै रोर कांपै
बखना जी
रे मन सूर समै क्यूं भागै
रज्जब जी
मना मान रे कह्यो
ऊमरदान लालस