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साइट: परिचय
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अंजस सोशल मीडिया
मन पर दूहा
कविता
दूहा
पद
काव्य खंड
उद्धरण
रमैणी
सबद
दूहा
16
दौदा धाहरिया हुवा
बखना जी
जे डंक लागें सर्प का
बखना जी
भरिया होई तौ कदेन डोलै
बखना जी
कौसा चौसर लैंणनैं
बखना जी
‘बखना’ मैल विचारि करि
बखना जी
भंवरा अठै मत आइजै
हरसुख धायल
पांच छिकारा मृगइक
बखना जी
रांडां मिली मंगल कीयौ
बखना जी
आया होई तो जाई क्यूं
बखना जी
तिरि तेरू थाके सबै
बखना जी
हांजी कहत होइ भल
बखना जी
दूध मिल्यौ ज्यूं नीर मैं
बखना जी
कौडी रमंता डावङौ
बखना जी
‘बखना’ बहुत बर नसिया
बखना जी
सत जत सांच खिमा दया
बखना जी
भर्या न फूटै चिणगन छूटै
बखना जी