इण धरती री भोळी मायड़ पूत मारनै धरम रखै,

इण धरती री गैली जोगण प्रीत पाळ नै जहर चखै।

इण धरती री माटी मूंगी चंदण रै अंबार सूं,

इण धरती री पदमण कामण मान राख अंगार भखै।

स्रोत
  • पोथी : जागती-जोत ,
  • सिरजक : भगवतीलाल व्यास ,
  • संपादक : कन्हैयालाल शर्मा ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादेमी, बीकानेर (राज.) ,
  • संस्करण : मई, अंक - 03
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