छंद हणूफल

इहां आई कुंभ उदार, करतो समुख जैकार।
घण घाव बाणां घीच गाढोस कुंभ गलीच।
अब रांम जिम चहुवांण, कर हूंत खैंची कुबांण।
सर वाही भूपति सोइ, हठ कुंभ सिर बिनु होइ।
इहां मर्यौ कुंभ अनीत, रामैण सर सूं रीत।
उण समै रावण आइ, भाराथ करि मन भाइ।
दल राम वालै लूठ, पल एक नहं दै पूठ॥

रांवण चलायौ रीस, सजै खट च्यार सीस।
पैला परै दांत पीस, आयौ उणवार।
बावतौ करा सूं बांण, घणौ करै कच्रघांण।
आचां तोल अस्समांण, आखतौ आपार॥
धका-धूमौ धाव धीक, झटकां उड़ातौ झीक।
प्रथी पै नांखतौ पीक, चाबतौ तमोळ।
रूंकड़ा करंतौ राड़, बीस हाथ बांव राड़।
फक्का मारै मूंडा फाड़, चख्खा कीया चोळ।
ठोकरां उड़ातौ टौल, घणी माचै घम्मरोळ।
बणी जठै रोळ बोल, साझै अवसाण।
आयौ रामचंद ओड़, जुधां करै हाथ जोड़।
दांत्या करै दौड़ दौड़, खैंचतौ कुबांण॥
वाह्यौ रामचंद वाण, चुकौ नहिं चहुवांण।
पोहौपती करै पांण, फोड्यौ दुष्ट फट्ट।
झाटां खाग कितां झड़ै, लखां सूरवीर लड़ै।
प्रथी सीस आण पड़ै, दल माथा दट्ट॥

छंद दूहा

मारी लंका महपती, रावण सुधा रंजाट।
इंद्रजीत हणि आवधां, कुंभकरण सिरकाट॥

महल पधारै महपती, करौ फतै मछरीक।
रावण मार्यौ राड़ि करि, झटकां बाही झीक॥

करै दरीखानां सकज, नजरि लियै नरियंद।
समपै बीड़ा सोहड़ां, मौजां लहर समंद॥

दीपमाळ कातिक दरस, हीड़ां बगसि हजूर।
पछै सिरकार पधारिया, पून्यूं उतर्यां पूर॥

चढि घोड़ां भड़ चक्रवती, तेज लिया कर तैण।
खळां कमळ तूटै खगां, रण जूटै रांमैण॥

छंद हणूफाल

घर चढै रांमौ धींग, असवार लिया अडींग।
कर कोप चढि कराळ, क्रत लोयण विकराळ।
तहां दियौ हाको घेर, दिया पंथ हाथी फेर।
तहां उठै सूर तुरंत, असवार रोकै पंथ॥

छंद दूहा

गिड़ ताहां बांने गढपती, चित उजल चहुवांण।
महपति रांमा तणौ, सिर लग्गो असमांण॥

छंद मोतीदाम

रज्जक फलक्क धमाधम रीठ।
छमाछम बज्जत मृद्दंग दीठ।
हरखत फौत बिसेस अघाय।
विहूंवळ मृद्दंग ताळ बजाय।
दिये ताहां ठोकर घोड़ा नै पीठ।
उड़ै ताहां पाहाड़ा जैम अदीठ॥

छंद दूहा

सूरज रथ सपतास सा, उड़िया तहां तुरंग।
जाळी नूं गिड़ जोरवर, बाजै ताळ मृद्दंग॥

स्रोत
  • पोथी : राम रंजाट ,
  • सिरजक : सूर्यमल्ल मीसण ,
  • संपादक : उषा कंवर राठौड़ ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी शोध संस्थान, चौपासनी, जोधपुर ,
  • संस्करण : प्रथम संस्करण
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