यो

कुण छै

जे डरावै छै

म्हारै ताईं

हर घड़ीं हर पल

अर डर जाऊं छूं म्हूं

जस्यां कै कोई कबूतरी

डर जावै

देख'र बल्ली नै

भर लूं छूं

अंधारा नै आपणी आंख्यां में

हाथ-पावां ईं अेकठा कर'र

आपणा भीतर

टकराबा लाग जाऊं छूं

अपणां आप सूं

खड़ जावै छै घड़घड़ाती

म्हारा हिरदा की पटरी पै सूं

सांसां री सुपरफास्ट रेलगाड़ी

दन में बी

सुणर क्वाड़ां पै दस्तक

क्हवा दूं छूंं छोरा-छोर्‌यान सूं

कै म्हूं कोइनै घर के मांही

नत-रात की आदम्यां कौ हजूम

हाथां में लेर कामड़्यां

दौड़यो-दौड़्यो आवै छै म्हारा आड़ी

सुपणा में

यो कांईं हो ग्यौ छै म्हं नै

यो कुण छै

जे डरावै छै म्हारै तांई

म्हारै मांयनै।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : कृष्णा कुमारी ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-28
जुड़्योड़ा विसै