म्हनै इणरै पछै

किणी दूजै जीवण री आस नीं है।

जे जीवण भूंडौ है

तौ म्हैं इणमें जिका-जिका दुख भोग्या हूं

उणनै देख देवता राजी'ज हुवैला।

जे जीवण चोखौ है

तौ उणनै दोवड़ावण सूं

इणरौ सुख खतम नीं हुय जावैला।

स्रोत
  • पोथी : अपरंच अक्टूबर-दिंसबर 2015 ,
  • सिरजक : कैसियानो रिकार्डो ,
  • संपादक : पारस अरोड़ा ,
  • प्रकाशक : अपरंच प्रकासण
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