वै खुद रै मूंडै राख्यां हाथ

पाणी रै पसराव नै उभा ताकै।

जिकौ कीं कैयौ जा सकै हौ

वौ केह दीनौ है।

हेरॉन री भांत

तावड़ै री चमक

नीचै कीचड़

अर मांय छिपियोड़ा डेडरा

इण सारूं

अबै वै मून धारियां रैवैला।

पण

वांरी हथाळियां रै बिच्चै

ढकियोड़ा चैरां माथै

होठां री कोरां सूं बारै आवै है हंसी।

अर वै अपणी खूणियां

सांझ माथै टिकाया झुकै है

अर

सदियां पुराणौ घरड़ाटौ

पाछौ सरू कर देवै है।

स्रोत
  • पोथी : रसूल अमजातोव अर विदेसी कवितावां ,
  • सिरजक : डेविड वैगनर ,
  • प्रकाशक : रॉयल पब्लिकेशन, जोधपुर ,
  • संस्करण : प्रथम संस्करण
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