पच्छिम सूरज ढूकै, होकर गैरो लाल।

नैणां आगै घूमज्या, थारी बिन्दी भाल॥

जद-जद सूरज आथणैं, छिड़क लाल गुलाल।

म्हारै मन में बसै, गोरी थारा गाल॥

श्याम घटा जद ऊमड़ै, रूप धर्‌यां बिकराळ।

उलझैं मन में आयकर, काळा काळा बाळ॥

कोयल कूकै बाग में, मैक लुटावै आम।

सांस थारला बसै, मन में आठूं याम॥

सीळी पून सुहावणी, तारां छाई रात।

म्हारै मन में घूमड़ै, थारी मीठी बात॥

घणी लुभावै चानणी, शरद काळ की धूप।

नैणां आगै घूमज्या, सुगणी थारो रूप॥

झिल-मिल तारा सोवणा, आभै मुळकै चांद।

गोरो मुखड़ो थारलो, आवै म्हानै याद॥

जद-जद आवै कामणी, कूप सरोवर तीर।

नैणा आगै तणै, प्यारी थारो चीर॥

थारै बीना आवड़ै, मनड़ो घणू उदास।

चैन पड़ै नीं डील में, गिण गिण लेऊं सांस॥

सरसूं फूली खेत में, सोनै बरणा फूल।

तूं कैदे गोरड़ी, कैयां जाऊं भूल॥

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : महावीर जोशी ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 15
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