गांव री कांकड़ सूं दूरां-दूर
मोरबनी में ऊभौ है रूसणौ मांड’र
आज फेर गोकरण
गांव सूनौ-सो पड़्यौ है
गूंगी पड़ी है चौपाळ
बरजी दादी अडीकती-अडीकती आखती हुयगी है
बा बरकै है बांडियै कुअै री सारण में—
“ठालै-भूलै कैण रे कारै दे दियौ गोकरणियै नै!
बाळ्यौ टाबरां सूं ईं बत्तौ चाळागारौ
लाओ रे कोई मनाय-मनूय’र
बो तो घणौ ई आ जासी
मनवार रौ काचौ है
अंतस रौ आछौ
लाडोकड़ गोकरण!”
सूरज आभै में अणमणौ-सो तपै है आज
दड़ूक नीं तो कीं नीं
घेर लाया! घेर लाया!!
गोकरण नै मोट्यार
अणियाळा सींगां नै सूरमौ
थिरकती थुंई रौ फूंफाड़ नथियौ
चंवर सरखी पूंछ ढुलांवतौ
दड़ूकतौ आयग्यौ सूरज साखीणौ नंदीसर!
गांव रौ पौरायत
टीकायत राजवी चौपगौ
औ दड़ूकै है जिनगाणी
गांव री ओपमा उचारै
इणरै हेजां-धीजी, हेतां-भीजी
काजळ, गोमती अर सोहनी गंगा
अर उणां रा कुचमादी डूडिया
आज ऊजळी आघोर में नाचै है
अखी जमारौ गूंजै है
मोरा ही टहूक
हिरणियां री दड़बड़
तीतरियां री लुक-मीचणी
अर कोयलड़्यां री कूक
आं सगळां रौ मेळ निभावै
तो गोकरण!
टाबरा में टाबर
दानां में दानो
अेक बोलतौ-चालतौ-सो
सावचेत गमेत जमानौ
गांव री गरजणा रौ धणी
नखराळौ गोकरण
अर ईं सूं बत्ती इणरी दड़ूक
खम्मा घणी!