अणथाग अंधियारै

थूं लागी म्हारै हाथ

सुळगी मांदी आंच—

साव भोळी-डाळी मोमबत्ती।

अणथाग अंधियारै

अजेस बगतो जावूं मैं

उबारतो बायरै सूं थारी जोत

उबरतो आप थारै चानणै

पगां आंवती अबखाई सूं।

स्रोत
  • पोथी : उतर्‌यो है आभो ,
  • सिरजक : मालचन्द तिवाड़ी ,
  • प्रकाशक : कल्पना प्रकाशन, बीकानेर ,
  • संस्करण : प्रथम संस्करण
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