मालचंद तिवाड़ी
सिरैनांव कवि-कहाणीकार। राजस्थानी-हिंदी दोन्यां में लगोलग लेखन।
सिरैनांव कवि-कहाणीकार। राजस्थानी-हिंदी दोन्यां में लगोलग लेखन।
आतम भूख
अेकज आस
अग्नि
आंसुवां री सिमरणी
बाळपणै रो शो-केस
चांदणी रस सींवा परबार
छेकड़ ताल रो अेक बोल
डाळी पर डाळी रै लचकै
धरती रै सिरै अंधकार में
हस्ती रै परबार
इण भांत फेरूं अेक रात
इण भांत राखी थूं
मैं नी दीन्यो उपहार में सबद-कोश
म्हारी सूं सवाई सांवठी
म्हारी नींदां सूती थूं
मिरतूमुख: मां रै सिरांथै सूं
नगर रै नासां पूग्या प्राण
ओढ्यां तारां छाई रात
पाक्यां पैली म्हारी नींद
पृथ्वी
सवार
सुख सागर री लकड़ी
थाकल सबदां नै
उबारै उण याद रै
उबरतो आप थारै चानणै
ऊंडै आभै गूंजती