रस्ता कुणसा भी

सोरा कोनी होवै

हर में रस्ते में

दुनियां भर का

कांटा,

भर भर कै

व्याध्यां होवै—

जिकी पग पग पर

रोड़ा अटकावै

पण कित्ती भी

तकलीफ क्यूं ना होवो

सबको कोई कोई

तोड़ तो होवै है

अयां मत सोचो कै

जठै मुसीबत आसी

बा बीको तोड़ भी ल्यासी।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : बनवारीलाल अग्रवाल ‘स्नेही’ ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी ,
  • संस्करण : अंक-44
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