नवी खोजां सूं चकरीबम्म व्हिया

जिका आरसियां रै सागै आपणी जिनगाणी बेची

नवी खोजां वांनै चकरीबम्म करै

जिका थोड़ा टैम सारू आपणी जिनगाणी बेचै

नवी खोजां चकरीबम्म करैला वांनै

जिका कदैई नीं केवैला ‘अबार’

नवी खोजां व्ही है अर फेरूं व्हैला

अर आपां इतिहास री चालती रेल मांय

फलांग मार चढ़ जावां

वा केवण सारू कदैई नीं ठेरै—

‘कठै जा रह्या हो थै?’

‘अबार’ कैवण सारू कदैई नीं ठैरती इतिहास री रेल।

अर चांदणी रै भोळप ज्यूं

बैवै है वा

चांद री पड़ी पळक

अैड़ी पांखड़ियां है वै

पाणी मांय पुरखा रा उणियारा

लागै ज्यूं रंगां में कदैई नीं रळियौ रगत

अै पांखड़ियां पुरखां रा उणियारा।

दुख देवती आंख्यां सांरू।

स्रोत
  • पोथी : रसूल अमजातोव अर विदेसी कवितावां ,
  • सिरजक : नजाबुलो एस. नदेवल ,
  • प्रकाशक : रॉयल पब्लिकेशन, जोधपुर ,
  • संस्करण : प्रथम संस्करण
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