उण आपां नै धर-पकड़िया

नांख दीना जेळ में

म्हनै मांयली कांनी

थन्नै उणरै बारै

म्हारी हालत इत्ती खराब नीं है

उणसूं की घणी

खराब बात है

जाणै कै अणजाणै ढोवणौ मांयलै जेळखानै नै

घणकरा लोग आजकाल ओईज करै है।

पेटी सूं काढौ वा स्कर्ट

जिण मांय म्हैं थन्नै देखी ही पैलमपोत

अर

केसां में लगावौ वौ कारनेशन

जो थन्नै म्हैं भेज्यौ हौ जेळ सूं।

भलांई वौ कितरौ

किलमिलाईजियोड़ौ, बीखरियोड़ौ व्है

संवरौ-सजाऔ

अर

दीखौ खिलियोड़ी

बसंत री गळाई ठावकी।

थन्नै निकळणौ चाईजै माथौ ऊंचौ कीनोड़ौ

गीरबै सूं वैवणौ चाईजै थन्नै

नाजिम हिकमत री जोड़ायत री दांई

मान सूं भरियोड़ी।

स्रोत
  • पोथी : रसूल अमजातोव अर विदेसी कवितावां ,
  • सिरजक : नाजिम हिकमत ,
  • प्रकाशक : रॉयल पब्लिकेशन, जोधपुर ,
  • संस्करण : प्रथम संस्करण
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