थनै कंई ठा

कतरो फैल्योड़ो हो म्हारै आंगणां मांय

घेर-घुमेर चार्‌यूंमेर

वड़ला रो रूंख?

वींनै काट'नै थैं कित्ती हत्या मोल ली

प्रायस्चित करणो पड़ैगो थनै इण पाछै

कित्तो सराप झैलणो पड़सी थनै इण पाप रो

थनै कंई ठा?

वो रूंखड़ो मातर रूंखड़ो नीं हो

कंई ठा म्हारी कित्ती पीड़ियां रो लेख-रूंख हो

दूध अर दही स्यूं सींचता हा म्हारा दादा

दादी हेंग-दन वींरी पूजा कर सवाग लेवती

म्हारा सगळा पूर्‌वज पुण्य कमाया वणी सूं

थनैं कंई ठा?

ज्यूं-ज्यूं वड़ल्यो वधतो

म्हारो परवार वधतो

घर-बार फळतो-फूलतो

थाळी जेड़ा मोटा पाना हा वींरा

सिंदूर जेड़ी सिंदराई वींरी कूंपळां ही

सोना जेड़ी वींरी छाल

नख स्यूं उतारी जाती

वड़ल्यो दूध देवतो

ज्यूं पूत देवतो

नव लख देवियां

वडै डाळा माथै हींडो लेवती।

थनै कंई ठा?

रूंख कटै ज्यूं परवार कटै

आपरी आंगळी तो काट'नै देखो थां

कित्ता रो आसरो हुवै रूंख

परवार घर-बार हुवै रूंख

थनै कंई ठा?

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : महेन्द्र भानावत ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी ,
  • संस्करण : अंक-44
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