आम अमरोहा देख कर, खिलगी खेजड़ियौंह।

कोयल टहूकों कळपती, मरुधर मौरूड़ौह॥

कांठळ मत हो कठमठी, धोळा देख धौराह।

अठै मूमल रा माळिया, मरवण री मैड़ीह॥

मरवण जैड़ी मोकळी, मूमल वाळी लट्ट।

थळवट थांरै थार में, हियै हेम री हट्ट॥

ऊभोड़ी ऊंची घणी, बैठी जाणै बतग।

फिरती लागै फूटरी, उण नारी नै रंग॥

सपन में प्रीतम मिल्या, म्हैं लागी गळ रोय।

डरती पलक नंह खोलिया, हिया बिछोवा होय॥

लड़ाझूम रैह नारियां, लाम्बै घूंघट नूर।

नर झुकावै मौलिया, साफा बांधै सूल॥

मरियो मेलै मूंदड़ा, जीतो जवार जंग।

अदबिदरा आवै नहीं, रणबांकुरो रंग॥

पन्ना थूं प्रकट हुई, राजवंश जड़ राख।

नाम थांरो इतिहास में, आखी दुनियां अेक॥

प्रण दियो पाबूह, सिर देऊं गायां साटै।

अधबिच में उठग्यौह, हथळेवो तज हाथ सूं॥

कलंक कोढ़ियो झाड़ियां, साझा किया शरीर।

अमलां वेळा आपनै, रंग हो रामा पीर॥

चेतक री चालांह, औरां नै आवै नहीं।

पातल री पूंगीह, बिणजारो बाजै नहीं॥

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : कानसिंह भाटी ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-33
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