अे

बाबो बोल्यो अरै छोरा!
आपणो इतणो बडो प्रान्त है
फेर ई अठै
नौकरियां रा तोड़ा क्यूकर पड़ग्या?
छोरो बोल्यो
बाबा! आपणै प्रान्त रै
भासा री बाड़ कोनी
सूनो खेत देख’र
आरला-बारला गोधा आ’र
बड़ग्या।


दो

बाबो बोल्यो—अरै छोरा!
तेरा तो अस्सी परसेन्ट नम्बर हा
तूं फेर ई नौकरी क्यूं कोनी
लाग्यो?

छोरो बोल्यो—
'बाबा के करुं?
फर्जी डिग्री ले’र अेक नब्बै परसेन्ट
वाळौ बारै सूं आग्यो
अनै मेरलै अस्सी परसैन्ट नै
खाग्यो'।


तीन

बाबो बोल्यो— अरे छोरा!
'आ हिन्दी हमारी मातृ भाषा है'
बै बोर्ड टांगणिया साथै
तेरी जचै कियां कोनी?
छोरो बौल्यो
बाबा जचै कियां?
आं अकल रै पट्ठां नै
राष्ट्र भाषा अनै मातृ भाषा रै फरक रो ई
ठा कोनी।


च्यार

बाबो बोल्यो, अरै छोरा!
तूं कैवै कै मायड़ भासा नै मान्यता—
मिलतां ईं दो लाख लोग नौकरी लागसी
म्हारी जाण मांय तो
थारै भूल है।
छोरो बोल्यो—
बाबा! आपणै अठै, गांव-गांव
ढाणी-ढाणी, मोहल्लै-मोहल्लै मांय
प्राइमरी, मिडल, सेकेंन्डरी अर
हायर सेकेंन्डरी स्कूल है।
आं मांय जे मायड़ भासा रा
अेक-अेक मास्टर ई लागसी!
तो थे अन्दाजो लगावो
कै कित्तां रा भाग जागसी


पांच

बाबो बोल्यो—अरै छोरा!
अै दूजै प्रान्ता वाळा
राजस्थान कानी ई धिकै
दूजै प्रान्तां मांय नौकरी क्यूं कोनी लागै?
छोरो बोल्यो—
बाबा बै बाकी प्रान्तां री आप-आप री भासा है
बठै बै उण भासा मांय
दसवीं जमात पास कर्‌योड़ी मांगै।


:

बाबो बोल्यो—अरै छोरा!
कैई लोग कैवै कै—
हिन्दी है जठै-जठै
राष्ट्र है बठै-बठै
ओ कांई ढंग है?
छोरो बोल्यो—
बाबा! आं अकल रै आंधा नै ओ ठा कोनी।
कै पुरो रो पूरो दक्षिण भारत ई
राष्ट्र रो ई अंग है।


सात

बाबो बोल्यो—अरै छोरा!
मायड भासा नै मान्यता कियां मिलै
इण री लिपि कोनी।
छोरो बोल्यो—
बाबा! लिपि तो हिन्दी री ई कोनी
देवनागरी है
जिकी संस्कृत री लिपि है
आ बात म्हां सूं छिपी कोनी।


आठ

बाबो बोल्यो—अरै छोरा!
कैई लोग कैवै
कै राजस्थानी री मानता सूं
हिन्दी कमजोर पड़ैली।
छोरो बोल्यो—
बाबा! हिन्दी री नींव मांय राजस्थानी है
अबै थे ई सोचल्यो—
कै नींव रै मजबूत हुयां
इमारत मजबूत हुवैली कै धूड़ैली?

नो

बाबो बोल्यो—अरै छोरा!
राजस्थानी नै मान्यता दियां
हिन्दी बोलियां री संख्या घटै है।
छोरो बोल्यो—
बाबा! राष्ट्र भाषा बणण तांई
बोलणियां री कांई दरकार है?
जे हुवै है तो आपणै देस मांय
अंग्रेजी बोलणियां कठै है?


दस

बाबो बोल्यो—अरै छोरा!
हिन्दी महान है
हिन्दी सूं देस नै घणी आसा है
छोरो बोल्यो—
बाबा हुवैली?
पण आज री तारीख मांय तो
हिन्दी गरीब लोगा री भासा है।
बाकी तो तगारी ढोवणियै कनै ई
जे फीस हुवै तो
आपरै टाबरां नै अंग्रेजी इस्कुल मांय
भणावै है। हिन्दी इस्कूला मांय तो
जिकै मा-बापां कनै
वांरी फीस नीं हुवै
बांरा टाबर जावै है।
हिन्दी रा अै सै हेताळू
आपरै टाबरां नै
अंग्रेजी इस्कूलां मांय भणावै है।


बोलियां

बाबो बोल्यो—अरै छोरा!
'आपणै प्रान्त मांय तो
हाड़ोती, ढुंढाड़ी, मेवाती, बागड़ी अनै मारवाड़ी कैई भासा है
आंरै बोलण मांय ई फरक है'।
छोरो बोल्यो—
बाबा! ओ भी सुवारथी लोगां रो कुतरक है
भासा तो बा हुवै
जिकी रो आपरो शब्दकोश हुवै
व्याकरण हुवै
अनै जिकी मांय
मोकळी तादाद मांय साहित सिरजण हुवै
बाकी री बोलियां, उप भासावां तो
बीं रो आभरण हुवै।


जणा हिन्दी मांय—

बृज, अवधी, मगधी, मैथिली
भोजपुरी, बुंदेलखण्डी, छत्तीसगढ़ी जिसी
छत्तीस भासावां बोली जावै
तो बां लोगां नै
म्हारली भासा री च्यार बोलिया
क्यूं कोनी सुहावै?

अलगाववाद

बाबो बोल्यो—अरे छोरा!
कैईं लोगां रो विचार है
कै राजस्थानी नै मानता मिल्यां
अलगाववाद बधसी
राष्ट्र री अखण्डता नै खतरो हुवै लो
तेरो कांई ख्याल है।
छोरो बोल्यो—
बाबा! सुवारथी लोगां री चाल है
भासा तो
अेक सार्वभौमिक शाश्वत सत्य दांई हुवै है
बा नै कोई जात री हुवै
नै देस री
नै कोई धरम री हुवै
नै भेस री।
भासा तो मिनखां नै जोड़ै है
तोड़ै कोनी
अन्यथा 'काजी नजरूल्लइस्लाम'
‘बंगला’ मांय नीं गांवतो
अनै बंगला देस जेहड़ो मुस्लिम राष्ट्र
उणनै आप री राष्ट्र भासा
नीं बणावतो।

बाबो बोल्यो—अरै छोरा!
भासा, भासा, भासा
म्हूं तो सुणतो-सुणतो आखतो हुग्यो
ओ नित-नित रो रांडी रोवणो
क्यां रो है?
स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : मोहन आलोक ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन, पिलानी ,
  • संस्करण : अंक-19
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