(अेक)

दस बजतांई दफ्तर खुलग्या
आग्या कै सब हाकम, बाबू, सैणा, चपरासी
खुलग्या कै बजर किवाड़
अणजाणी काळ गुफा का
जीमें बुज रहया छै भाग भरम का
झूंठी थरता बी नं आई ज्यांकी पांती
वै ऊभा छै
दिन उगबा क पहली सूंई जे चाल्या छै घर सूं

थैला मं सेळी रोट्यां बिना स्याग क
बंधी पोटली मं कांदा क भेळै

धोळा कागदां प कुणनै खांच्या
अमट रींगटा काळी स्याई सूं
जे उजळाई नं होया दिन म्हांका
बरस बीतग्या जनम बीतग्या

अब बांचै, कुण बांचै
अस्या कठण का लेख
म्हांका करमां का
थां बी तो बोलो ए! बाबू साब,
आप बी तो होगा पढ्या लिख्या
थोड़ा घणा!

(दो)

बजगी पांच टैम बीतग्यो
सब दफ्तर जुड़ग्या
जुड़ग्या बजर किंवाड़
जुड़ग्या तकदीरां का ताळा जबरा
उम्मीदां सारी बुझगी
आस मटगी

अब जाओ
काल्ह खुलैगा दफ्तर
पेशी पड़गी
जे नं होयो आज
ऊ काल्ह होवगो
जे रहग्या वांकी तकदीरां को फैसलो
कद आवैगो काल्ह
कुण जाणे?

कद आवेगो यो काल्ह
थां बी तो बोलो ए! बाबू साब,
आप बी तो होगा पढ्या लिख्या
थोड़ा घणा।
स्रोत
  • पोथी : आंथ्योई नहीं दिन हाल ,
  • सिरजक : अम्बिकादत्त ,
  • प्रकाशक : बोधि प्रकाशन ,
  • संस्करण : प्रथम संस्करण
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