हरमेस दिरावूं म्हैं
खुद नै भरोसौ–
मसखरां री भीड़ में
कठैई हुवैला मिनख
आवैला सामी
अर देवैला पड़ूत्तर म्हारै सवालां रो।
हरमेस ऊगै है सूरज
उजियाळौ हुवै
अर पाछौ छाय जावै अंधारौ
बधती जावै है
आ मसखरां री भीड़,
म्हारा सवाल
घेर लेवै म्हारी दीठ
अमूंज’र रैय जावूं म्हैं।
हरमेस ज्यूं ई आज
म्हैं सवाल करूं हूं खुद सूं
यूं कद तांईं देवूंला
खुद नै भरोसौ?
आ मसखरी भीड़
छेवट खाय जावैला
मिनख री दीठ
छाय जावैला म्हां सगळां पर
कांईं उण दिन तांईं
मिनख रैय सकैला कठैई
मिनख नै धीज बंधावण सारू?