अम्बर सूं लाय बरसै
नीचै भट्ठी ज्यूं धरती तपै।
सूरज शिखर माथै
दुबळी-पतळी सी नार
माथै टोकरी सड़क किनारै
हिच-हिच माटी सूं खपै
अम्बर सूं लाय बरसै
नीचै भट्ठी ज्यूं धरती तपै।
कांई करै बापड़ी निबळा
भूख पेट री दुखी करै
टाबरिया बिलखै भूखा घर में
जद बा भूखी मजूरी करै
अम्बर सूं लाय बरसै
नीचै भट्ठी ज्यूं धरती तपै।
धणी चढ्यो काळ मुख में
नौ-नौ आंसू नैण ढळै
खेती पाती नीं रै बिणज बापरी
निबळा दिनुगै ध्याड़ी चढ़ै
जद बा आटै रो जुगाड़ करै
अम्बर सूं लाय बरसै
नीचै भट्ठी ज्यूं धरती तपै।
धिक्क धणियां थानै मंत्रीजी
संसद में हेलां सूं कांई बणै
अबळा.. निबळा री करै चाकरी
भूख तिस्यां री जुगत करै
शम्भु सरल लिखूं मैं सांची
जद थारो जीवणो सफल बणै
अम्बर सूं लाय बरसै
नीचै भट्ठी ज्यूं धरती तपै।