1

कऊं सिळगाय
होकौ गुड़गुड़ाय
हांफै है-कांपै है
डांफर सूं करतोड़ौ बात
घाल हियै में हाथ
सियाळै री रात
म्हारौ बाप

2

हीटर सिळगाय
बंगळौ गरमाय
पलंग ढाळ
रजाईयां राळ
ओढै है पोढै है सियाळै नै सरमावतौ
सियाळै री रात 
म्हारौ बाप 

3

धावतौ ढळग्यौ सूरज
धोरां में डूब थाक’र थेपड़ां उतरगी
अंधारै-अंधारै पसरतो
डामतौ-दाझतौ
झाड़ झंखाड़तौ
ऊभौ है
पीरीयै री पोळ रळकावतौ रेळियां
कुन्नियै री कऊं
गुड़गुड़ावतौ होकौ
तपावतौ ठरियोड़ा हाथ
चूनकी रै चूल्है री आगळ जड़्योड़ी छाती सूं
खिण खावतौ खैंखार
ऊभौ है! ऊभौ है!
गंगीयै री ग्वाड़ी दाझण
लीलै रूंखां रौ डील

बदळ्यां अलेखूं रूप
डामतौ-दाझतौ आपरौ खुद रौ उणियारौ
हिमाळै लियां उनाळू रूप
ऊभौ है! ऊभौ है! ऊभौ है!

स्रोत
  • पोथी : माणक (पारिवारिक राजस्थानी मासिक) ,
  • सिरजक : मीठेश निर्मोही ,
  • संपादक : पदम मेहता ,
  • प्रकाशक : माणक प्रकासण ,
  • संस्करण : मार्च 1987
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