गंडकड़ो भी

जाणै छ, पछाणे

कुण घर को अर

कुण बारै को छ?

कुण चोर अर

कुण साहुकार?

गंडकड़ो

कभी भी

कायर ज्यूं

पाछै सूं न्ह काटेगो

आज को मनख बण

गंडकड़ो तो

मरद का बच्चा ज्यूं

आगे आ, गुर्रारै

दौड़ काटणो हो तो।

गंडकड़ो

न्ह करै मौका की तलास

अर ही पाछै सूं हमलो

गंडकड़ो भी सिद्धान्तवादी

वसूलां को पक्को।

आज का मनख

थोड़ी तो सीख लो।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : रामदयाल मेहरा ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-17
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