प्रीतड़ी

कैड़ी

थांरी प्रीत

नेह लगाय नै

मोह बधाय नै

खाली करग्यौ

मनड़ै रो पिंजरो।

ज्यूं

कोई किरायेदार

खाली कर जावै

अचाणचक

घर।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : मदनमोहन परिहार ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-33
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