आप म्हनै

इण संसार री गळियां मांय

इण भांत अेकली मत छोडौ

अणगिणती रा रस्ता-मोड़

अणगिणती रा घर

अर अणगिणती रा जाण्या-अणजाण्या

लोक अर वां री कुचालां।

अणगिणती रा आवै बेळा-कुबेळा।

इण वास्तै बना!

म्हनै इण संसार में

इण भांत अेकली मत छोडौ।

स्रोत
  • पोथी : माणक (पारिवारिक राजस्थानी मासिक) ,
  • सिरजक : श्रीमती सरोज कछवाह ,
  • संपादक : पदम मेहता ,
  • प्रकाशक : माणक प्रकासण ,
  • संस्करण : जनवरी 1987
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