सांची पूछौ तो—

बेटी, बाप रै मन

सवायै गिरबै री बात है

कोयल री जात है।

चौईस केरैट

सोनै री भांत है।

बेटी, बाप रै मन

जमारौ सुधारण रौ जरियौ है

धीजै रौ दरियौ है

बेटी, बाप रै मन

हरख री कोर है

आभै रौ छोर है

उण सूं राजी

माईतां रौ पौर-पौर है

बाप री जूण

अमावस है

तो बेटी थ्यावस है

बाप री जूण मरूथळ है

बेटी धोबौ भरियौ जळ है

बाप रौ बळ है।

सांची पूछौ तौ—

बेटी सत रो

सनातन कस है

बाप री

दुखती थकी नस है

बेटी, बाप नै

सनेव री थाप

देवण वाळी जोधार है

बेटी री फतै में

बाप री जूण रौ सार है।

बेटी, बापाजूण रै

सून्याड़ नै

भरण वाळौ गीत है

डरूं-फरूं जमारै में

बाप रै भरोसै री भींत है।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : कुन्दन माली ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-31
जुड़्योड़ा विसै