फुरसत कोई नै नीं है

निजू गोरखधंधा स्यूं

सूरज उगै अर आंथ ज्यावै,

पण चोंच में हुवै

फगत तुणकला

भोत, दोरो है

दाणै रा दरसण होणो

ईं जमाना में।

ईंयां रा बगत में

कुण पूछै कुरजावां स्यूं

बां रै कुरळावण री बाबत

कोयल रो कुण बणै हिमायती

कुण निकाळै सरपां नै

चूसां रा बिल में स्यूं

अै आप’ई रोवै

अर आप’ई पूंछै

आप रै हाथां स्यूं आंसू।

कण-कण माटी रो

मण-मण दर्द,

पण कठै फुरसत है सूवटा नै

आम रा बागां में आम

कदे काचा अर कदे पाका

खाणै नै खूब मिलै है,

के पड़ी है हंस नै

कै किण नै

कियां री पीड़ा है

बीं नै मिलर्‌या है

अणमांग्या मोती चुगणै नै।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : राधेश्याम अटल ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक–18
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