अजे ताईं

फेरबदळ

अर

उखाड़पटक

री बळ-बळती लूवां चालै

भूसळींजती भावनावां रा

भतूळिया

अूजळै आवै रै

गायै नै मटमैलो राखै

चेतनां रै चौक मांय

फण-फैलायां फणधरां रो

फूंफकार

गळियां री मोड़ सूं

गांव ताईं सुणीजै

अकलवाळां री

अकल पूणीजै

अचंभो है

सांच नै आंच लागरैयी है

लूंटा-खोस माचरैयी है

आंख्यां मीच’र

अंधारो करणै सूं पैला

हियै मांय कांगसी फेरो

समै रै दरपण में

देखो चै’रो

जद मालूम पड़ैला

कै कुण है कैं’रो

समै अेक सो कोनी रैवै

समै रो पगफेरो।

स्रोत
  • पोथी : हिवड़ै रो उजास ,
  • सिरजक : शिवराज छंगाणी ,
  • संपादक : श्रीलाल नथमल जोशी ,
  • प्रकाशक : शिक्षा विभाग राजस्थान के लिए उषा पब्लिशिंग हाउस, जोधपुर ,
  • संस्करण : प्रथम
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