1.

टेसण रै लारै
सड़क रै किनारै
सरवणीयै रो रैहणो।
मैली कुचेली अंगरखी,
फाट्योड़ी सी पगरखी,
ओई वींरो धन
ओई वींरो गैणो!

2.

बाई रो सो मूंडो,
लखणां में धूड़
दीखण में भूंडो,
सूणै कियां,
बधग्या झींटा,
ढकग्या कान।
ऊंची अेडी जूती पैर्‌यां,
ली आकतड़ी सी,
कमर कस्सै सूं बांध।
ओ फिरै भारत रो
बांकड़लो जवान।

स्रोत
  • पोथी : जागती-जोत ,
  • सिरजक : अब्दुल वहीद ‘कमल’ ,
  • संपादक : दीनदयाल औझा ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादेमी, बीकानेर (राज.) ,
  • संस्करण : फरवरी, अंक 12
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