जब भैणा गांव आवै’ई
घर कौ काम काज सकेलर
दुपैर पाछै चलै’ई
पाँच कोस धरती चलर
आँथासेक आ’र पौंचई
गांव का रूंखन कू देख'र
छाती उमक्यावैई
दूर सूँ’इ रोबा लग जावै’ई
भैण कौ रुधन सुण’र
भाई ठाडौ हो जावैऔ
बिन्या जूती फैर्याई
लिवाबा जावैऔ
गैला मं गळै मिल'र
ठाडा-ठाडा रौवैआ
दोनू भाई भैण
माड़ मं भैणन का
रुधन सूं’इ बण्यौ होयगौ या गीत–
‘बैई पगन बीरा चल दियौ
भैणा का दुख पायौ हो राम
दुख तौ रे बीरा भौत सौ
खैबा मं सार नहींअ हो राम।'