रोटी नै घणकरा लोग
सबसूं छोटी चीज समझै
वे कैवै—“रोटी रौ कांई!
रोटी तो कुत्तै नै ई मजै सूं हाथ आ जावै
वो भूखौ कोनी सोवै!”
म्हैं सोचूं—
कुत्तौ तो साचाणी अजूबौ जीव है
अेक रोटी सारू वो
कठै सूं कठै तांई
यानी के पूरब सूं पच्छिम तांई बुऔ जावै
पूंछ हिलावतौ, दौड़ लगावतौ...
भाई!
थूं भलां ई मानै चायै नीं मानै
म्हनै रोटी सगळी चीजां सूं मोटी निंगै आवै
स्यात, गहरी समझ इज मोटी है!
रोटी अर मिनख रौ रिस्तौ
जे इत्तौ गैरौ नीं व्हेतौ
तो इण धरती ऊपर आधा सूं ज्यादा मिनख
भूख रै फुटपाथ ऊपर नीं सूवता
अर नीं अे थोड़ा सा मिनख
मसखरियां करता
दिन दूणा अर रात चौगुणा मोटा व्हेता!
रोटी छोटी चीज व्हैती तो मिनख
इण तरै सूं अंतरिक्ष में
भटका नीं मारतौ रोटियां उगावण सारू
अर नीं राकेट अर अणुबम बणावतौ
अेक दूजै नै भस्मीभूत करण सारू
भाई!
थूं चौफेर निजरां पसार
अर गैराई सूं देख—
दो सूखी रोटियां सारू मिनख
आपरै मां-बाप रौ गळौ घोट सकै
अर खुद रै अणमोल जायां नै
रोटी रै मोल बेच सकै!
जे रोटी इत्ती मोटी चीज नीं व्हैती
तो आज जिकौ है, अर काल जिकौ हौ
वो सगळौ लफड़ौ नीं व्हेतौ!
आप-आपरी कोरी दो रोटियां सेकण सारू
ओ सगळौ संसार
आज जगै-जगै बळीतौ बाळ रैयौ है
अर राता-पीळा खीरा अंगेज रैयौ है
आपरी रोटी सारू इज वे राक्षस
अणगिणती रा हथियार भेळा करै
वां रौ वौपार करै
अर करोडूं-करोड़ भूखा-तिरसा लोग
रोटी री जड़ां नै सोधता-सोधता
भेळा व्हे
आपस में गुपचुप बातां करै
रीसां बळता हाका करै
यूं लागै—
जांणै वांरौ सगळौ दुख-दरद
रोटी रै घेरा रै चौफेर
भेळौ व्हेगौ है!
इण सगळी हकीकत सूं आंख्यां मीच’र
आज थूं भी आ बात कीकर कैयी
के रोटी सबसूं छोटी चीज है?
भाई! पाछौ सोच-समझ
अर म्हनै भी समझा—
रोटी सूं मोटी चीज
इण धरती माथै कुण-सी है?