पून रै साथै

रळकती बगै है रेत

आपरी मंजल पावण तांईं

तोड़ै है ताफड़ा।

आपरी कमजोर्‌यां नै उघाड़

करै है उज्जळ।

कण त्यागै है कण रो मोह

अनै घटतौ बगै है

भरम रो टीबड़ो।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : सन्तोष माया मोहन ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक–18
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