(1)

बिरह बण
थे ई दाझो डील।
मेळो,
रति-काम नै।
बुझो,
तो सुझावो
राह स्त्रजण री।

(2)

गिटूं
काचा-पाका
कन्द, मूळ, फळ, अन्न
भरूं
निज ओदर।
‘सिया’ थे
म्हारै अन्तर घट बैठ
पकाओ ‘राम’ रसोई।

(3)

थे तपावो
तपूं
जागै जळ-ईंच्छा।
जळ,
जीव रो जलम।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : सन्तोष मायामोहन ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशक पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 26
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