पीतळ री डळी नै

लोग खरो सोनो जाण लेवै

पण सोनै नै

सोनो जाणबा सूं पैली

घणा बैम अर अविश्वास करै।

स्रोत
  • पोथी : जागती-जोत ,
  • सिरजक : अर्जुन ‘अरविंद’ ,
  • संपादक : माणक तिवारी ‘बंधु’ ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादेमी, बीकानेर (राज.) ,
  • संस्करण : अप्रेल, अंक - 02
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