बेहिसाब ख्वाहिसां
आलथी-पालथी मार्यां
कनै आकर पसरी रवै
बांनै बोलां भागो अठे सूं
तो गुरावै...
जे म्है ही उठ कै ज्यावां
तो आपै सूं बारै हुय ज्यावै
भोत बेजां खरची करावै
म्हानै बोलै थे मत आओ चाहे
बस थारो करेडीट कारड देद्यो
साब अब थानै के बतावां?
मंजिल भोत दोरी मिलै साब!
रात दिन एक करणो पड़ै
और खरची भी करणी पड़ै
जणा जाकर मिलै मंजिल।