हित हिरदै में रैय बधाती, किरपा कर मां मन रै ढाणै।

सैंजत बठा सांवठी सावळ, सोकीं पूर प्रीत रै पाणै।

अरि विहीण कर देय धरा नै, मेट दखां दुःख दुविधा सारी।

मन भावण किरपा रै भेळै, मनसा पूर दखां मां म्हारी।

प्रीत राखै हेत उकसै, गरळ उढ़ेळ उणां रै थाणै।

हित हिरदै में रैय बधाती, किरपा कर मां मन रै ढाणै।

राखै मन में द्वेस भावना, करै चढ़ायी सेना साथै।

आळमेट कर नाख उणां नै, बरपा कहर उणां रै माथै।

पर घर लाय लगावै बांरा, क्यूं नी तूं खुर खोज भुजाणै?

हित हिरदै में रैय बधाती, किरपा कर मां मन रै ढाणै।

धारण कर हथियार सांवठा, पीड़ जगत नै देणी चावै।

पाड़ोसी रा नास करण नै, बैर भाव मन में उकसावै।

आप रैवणो चावै सुरछित, कूड़ भाव री छतरी ताणै।

हित हिरदै में रैय बधाती, किरपा कर मां मन रै ढाणै।

दानव-बैरी सदै पछाड़्या, पैल्यां रीछा करी सदै-ई।

हिम्मत बां री तोड़ दखां बै राख सकै नी बैर वदै-ई।

बख में रैय सदै वै म्हारै, माणस सगळा मौजां माणै।

हित हिरदै में रैय बधाती, किरपा कर मां मन रै ढाणै।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : सत्यनारायण शर्मा ‘इन्दोरिया’ ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-17
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