पून

बैवती ही

होळै-होळै

बाजरै रै सिट्टां नै छेड़ती

लाटो बुहारती

झाड़ख्यां सूं बचती

रोहिड़ा सूं पजती

अरणियां रै

कंवळै-कंवळै परस सूं छुलती

पून बैया करती ही

होळै-होळै।

पून

भाज्या करती

भिज्योड़ी पंगडंडी माथै

आखड़ती-पड़ती।

पून

आथण नै ढळ जावती

ऊंचली भर सूं

नीचलै डैर तांई

मोटोड़ै जांट सूं

बूढियै कैर तांई।

पून

तण जावती

आभै सूं जमी तांई

किनकै री डोर सी

पून

पून चालै है

बिरहण री हूक मांय

कोयल री कूक मांय

नानियै री भूख मांय

(रोटी रै टूक मांय)

पून है

जिकी चाल्यां जावै

पीढ़ी दर पीढ़ी

अर चढ़ी बगै है

सीढ़ी दर सीढ़ी।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : कृष्ण बृहस्पति ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 15
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