कंत कमावै मोकळौ,

प' कलाळां सारूंह।

घर रा सह ग्यारस करां,

पिऊ पियै दारूह॥

उडिकूं आधी रात तक,

वळह वे वारुंह।

दहुं रा दहुं भूखा सुवां

पिऊ पियै दारूह॥

कूका अणभणिया रहै,

कूक्यां वर सारूह।

पण बोतल बिण ना रहै,

पिऊ पियै दारूह॥

घरां पधार्‌या पावणां,

किण विध सतकारूंह।

सराजाम नह राबड़ी,

पिऊ पियै दारूह॥

मां जसड़ी धण मोकळी

मां जसड़ा मारुह।

सह शामल आंसू पियां,

पिऊ पियै दारूह॥

किण घर जा सुख सांस लूं,

कुणी जा पुकारूंह।

पीहरियै बाबल पियै,

(अठै) पिऊ पियै दारूह॥

सैं जोड़ै तीरथ करां,

धाम करां चारुंह।

म्हूं प्रभु चरणाम्रत पिऊं

(पण) पिऊ पियै दारूह॥

घर रा गंगाजळ पीआं,

अघ मेटण सारूह।

तरबेणी रै तीर पर,

पिऊ पियै दारूह॥

ख्यातां इण घर री कसी,

कसी बातां मारुह।

पीता बडका अरि रगत,

पिऊ पियै दारूह॥

गांव गोठ पाळा हलै,

महूड़ी असवारूह।

गज अस घर रा बेचनै,

पिऊ पियै दारूह॥

परभातै ले आखड़ी,

नह पीवण सारूंह।

सांझ पड़ै महफल मंडै,

पिऊ पियै दारूह॥

स्रोत
  • पोथी : जागती जोत ,
  • सिरजक : देवकरण सिंह ,
  • संपादक : कन्हैयालाल शर्मा ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादेमी, बीकानेर (राज.) ,
  • संस्करण : अगस्त, अंक 06
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