कोई वो भूख

लागो चायै किणनै ही

भूख तो हरेक भूंडी व्है

पण पेट री भूख

सै सूं भूंडी

इणरी जड़ां

इती उंडी कै

जनम सूं लेय’र

मरण ताईं

आदमी करतो रैवै

इण रो जाबतो

पण भूख रो रूंख तो

नित हरो, नित साबतो।

इण खाडा नै

नित भरै

नित खाली

हार खपै मानखो

जीत जावै

पेट नानखो।

स्रोत
  • पोथी : हिवड़ै रो उजास ,
  • सिरजक : विक्रमसिंह गुन्दोज ,
  • संपादक : श्रीलाल नथमल जोशी ,
  • प्रकाशक : शिक्षा विभाग राजस्थान के लिए उषा पब्लिशिंग हाउस, जोधपुर
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