पीड़ा हाळी गांठड़ी लियां फिरूं हूं आज।

कित मैलूं कित खोल द्यूं माची भाजम-भाज।

पीड़ा नीं दो च्यार है, पीड़ा नीं दस-बीस।

पीड़ा पूरो थान है, पीड़ा नीं कट-पीस।

अबखायां पोथी पढ़ी, बांच्या अण गिण पाठ।

आखर मंडिया पीड़ का साज्यां पूरा ठाठ॥

पीड़ा म्हारी मालकण में पीड़ा को दास।

बैरण जीवण व्यापारी छः रुत बारा मास।

पीड़ा भूखो पेट है पीड़ा नागी देह।

पीड़ा सूखो खेत है जठै बरस्यो मेह।

पीड़ा बूढो बाप जी, बेटी जोध जवान।

पीड़ा नुचतो डील है, पीड़ा लुटती ज्यान।

पीड़ा मोटा मांगतो, और गरीबी रोग।

टींगर डोलै काम बिन, बात बणावै लोग।

पीड़ा गिरतो मानखो, साहू बणगा चोर।

छल्लो भ्रष्टाचार को, ओड़ मिलै नीं छोर।

पीड़ा नेता आज का, रह्या देस नै लूट।

कुरसी सत्ता भोग हित, गेरै, मिनखां फूट॥

पीड़ा बढ़ता लोगड़ा घटता जंगळ झाड़

पीड़ा बै गद्दार है, चरज्यां बणकर बाड़॥

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : महावीर जोशी ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-29
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